पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

निबंधकार हास्य लेखक गद्य 2

जीवन परिचय

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म 1910 में उत्तर प्रदेश के झाँसी में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार और हास्य-व्यंग्य लेखक थे। उन्होंने व्यंग्य और हास्य के क्षेत्र में विशेष ख्याति अर्जित की। उनके निबंधों में दैनिक जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं को हास्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। उनका लेखन सामाजिक व्यंग्य और मानवीय मनोविज्ञान से भरपूर है।

प्रमुख रचनाएँ

  • निबंध संग्रह: क्या लिखूँ, अरे ऐसी की तैसी, हम और हमारा समाज, रसिक सम्राट
  • प्रसिद्ध निबंध: क्या लिखूँ?, दूर के ढोल सुहावने

लेखन शैली

बख्शी जी की शैली हास्यपूर्ण, व्यंग्यात्मक और आत्मपरक है। वे गंभीर विषयों को भी हल्के ढंग से प्रस्तुत करते हैं। उनके निबंध न केवल हँसाते हैं बल्कि सोचने पर भी मजबूर करते हैं। उनकी भाषा सहज, बोलचाल की और पाठकों से सीधे संवाद करती है।

साहित्यिक योगदान

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने हिंदी निबंध-साहित्य में हास्य और व्यंग्य की एक नई धारा को जन्म दिया। उनके निबंध आज भी लोगों को हँसाते और सोचाते हैं। वे हरिशंकर परसाई और श्रीलाल शुक्ल की तरह हिंदी व्यंग्य के प्रमुख स्तंभों में गिने जाते हैं।

गंगा पाठ्यपुस्तक में

गंगा पाठ्यपुस्तक के गद्य खंड में बख्शी जी का प्रसिद्ध निबंध 'क्या लिखूँ?' शामिल है। यह निबंध निबंध-लेखन की प्रक्रिया को हास्यपूर्ण शैली में प्रस्तुत करता है।

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