पत्र लेखन (अनौपचारिक)

रचनात्मक लेखन 5 अंक ~100 शब्द

परिभाषा

पत्र लेखन (Letter Writing) एक ऐसा लिखित संवाद-माध्यम है जिसके द्वारा हम अपनी बात किसी दूरस्थ व्यक्ति तक लिखित रूप में पहुँचाते हैं। पत्रों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जाता है — औपचारिक (formal) और अनौपचारिक (informal)। औपचारिक पत्र आधिकारिक कार्यों हेतु होते हैं, जबकि अनौपचारिक पत्र व्यक्तिगत संबंधों — मित्रों, परिवार के सदस्यों और निकटस्थों — के बीच लिखे जाते हैं।

परीक्षा में अनौपचारिक पत्र

कक्षा 9 हिंदी (गंगा पाठ्यपुस्तक) की वार्षिक परीक्षा में अनौपचारिक पत्र पूछा जाता है। इसके लिए 5 अंक निर्धारित हैं और अपेक्षित शब्द संख्या लगभग 100 शब्द है। पत्र प्रायः किसी मित्र या परिवार के सदस्य (माता, पिता, भाई, बहन आदि) को लिखे जाने वाले स्थल पर आधारित होता है — जैसे छुट्टियों का वर्णन, नई जगह का अनुभव, किसी घटना की सूचना, या आमंत्रण।

प्रारूप

अनौपचारिक पत्र का एक निश्चित प्रारूप होता है, जिसे क्रमशः इस प्रकार लिखा जाता है:

  • प्रेषक का पता: पत्र लिखने वाले का पता बायीं ओर से।
  • दिनांक: पत्र लिखे जाने की तिथि — पता के नीचे।
  • संबोधन: प्राप्तकर्ता का संबोधन — जैसे ‘प्रिय मित्र’, ‘मेरे प्यारे भाई’, ‘पूज्य माताजी’।
  • विषय-वस्तु: पत्र का मुख्य भाग — जिसमें संदेश, अनुभव, या सूचना विस्तार से लिखी जाती है।
  • भवदीय / आशीस: समापन सूचक शब्द — ‘भवदीय’, ‘आशीस’, ‘तुम्हारा प्यारा मित्र’ आदि।
  • हस्ताक्षर: पत्र लिखने वाले के नाम और हस्ताक्षर।

टिप्पणियाँ

  • व्यक्तिगत भाव: पत्र में व्यक्तिगत संवेदनाएँ, अनुभव और भावनाएँ प्राकृतिक रूप से अभिव्यक्त हों।
  • सहज भाषा: भाषा सहज, बोधगम्य और आत्मीय हो — अनावश्यक औपचारिकता से बचें।
  • आत्मीयता: संबोधन और समापन में आत्मीयता झलके — संबंध के अनुरूप शब्द चुनें।
  • प्रारूप का ध्यान: प्रेषक पता, दिनांक, संबोधन, समापन और हस्ताक्षर — सभी क्रमशः सही स्थान पर हों।
  • शब्द सीमा: लगभग 100 शब्दों की सीमा का ध्यान रखें।

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