व्याकरणिक कोटियाँ — संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया
हिंदी व्याकरण में शब्दों को उनके कार्य और अर्थ के आधार पर अनेक वर्गों में बाँटा गया है। इन वर्गों को व्याकरणिक कोटियाँ या शब्द-भेद कहते हैं। गंगा पाठ्यपुस्तक के व्यावहारिक व्याकरण खंड में इस विषय के लिए 4 अंक निर्धारित हैं। इसमें चार प्रमुख कोटियाँ आती हैं — संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया।
1. संज्ञा (Noun)
जिस शब्द से किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु या भाव का बोध होता है, उसे संज्ञा कहते हैं। जैसे — राम, दिल्ली, पुस्तक, ममता।
संज्ञा के भेद
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| जातिवाचक | एक ही जाति के सभी व्यक्तियों/वस्तुओं का बोध कराती है | लड़का, पेड़, पहाड़, नदी |
| व्यक्तिवाचक | किसी विशिष्ट व्यक्ति/स्थान का नाम | रानी लक्ष्मीबाई, झाँसी, रैदास |
| भाववाचक | किसी गुण, भाव या अवस्था का बोध कराती है | ममता, दया, सच्चाई, बचपन |
| समूहवाचक | किसी समूह या समुदाय का बोध कराती है | सेना, मंडल, झुंड, गुच्छा |
| द्रव्यवाचक | किसी द्रव्य या पदार्थ का बोध कराती है | सोना, पानी, तेल, लोहा |
गंगा पाठ्यपुस्तक से उदाहरण
- व्यक्तिवाचक: 'झाँसी की रानी' पाठ में — रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे।
- भाववाचक: 'रैदास के पद' में — ममता, भक्ति, करुणा।
- समूहवाचक: 'झाँसी की रानी' में — सेना, फौज।
- जातिवाचक: 'दो बैलों की कथा' में — बैल, किसान, आदमी।
2. सर्वनाम (Pronoun)
जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होता है, उसे सर्वनाम कहते हैं। जैसे — मैं, तुम, वह, यह, जो, कौन।
सर्वनाम के भेद
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| उत्तम पुरुष | जो स्वयं बोलने वाले का बोध कराता है | मैं, हम, मुझे, हमें |
| मध्यम पुरुष | जो सुनने वाले का बोध कराता है | तुम, तुम्हें, आप |
| अन्य पुरुष | जो बात करने वाले और सुनने वाले के अतिरिक्त किसी तीसरे का बोध कराता है | वह, वे, उसे, उन्हें |
| निश्चयवाचक | जो किसी निश्चित व्यक्ति/वस्तु का बोध कराता है | यही, वही, जो, वह |
| अनिश्चयवाचक | जो अनिश्चित व्यक्ति/वस्तु का बोध कराता है | कोई, कुछ, कई |
| प्रश्नवाचक | जो प्रश्न पूछने के लिए प्रयुक्त होता है | कौन, क्या, किसका, कैसा |
| संबंधवाचक | जो दो वाक्यों या शब्दों में संबंध जोड़ता है | जो, जिस, जैसा, जितना |
गंगा पाठ्यपुस्तक से उदाहरण
- उत्तम पुरुष: 'मैं और मेरा देश' पाठ में — "मैं अपने देश का नागरिक हूँ।"
- अन्य पुरुष: 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' में — "वे वन को गए।"
- प्रश्नवाचक: 'क्या लिखूँ?' पाठ में — "क्या लिखूँ, कैसे लिखूँ?"
- संबंधवाचक: 'संवादाधीन' में — "जो कहा वह सच था।"
3. विशेषण (Adjective)
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, परिमाण, संख्या आदि) बताता है, उसे विशेषण कहते हैं। जैसे — सुंदर फूल, तीन लड़के, मेरा घर।
विशेषण के भेद
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| गुणवाचक | गुण या दोष बताता है | सुंदर, अच्छा, बुरा, लंबा |
| परिमाणवाचक | परिमाण (मात्रा) बताता है | थोड़ा, बहुत, कुछ, पूरा |
| संख्यावाचक | संख्या बताता है | तीन, दस, अनेक, सैकड़ों |
| सार्वनामिक | सर्वनाम से बना विशेषण | मेरा, तुम्हारा, उसका, जितना |
| पदबंधवाचक | वाक्यांश के रूप में विशेषता बताता है | सोने का, दस रुपये वाला |
गंगा पाठ्यपुस्तक से उदाहरण
- गुणवाचक: 'झाँसी की रानी' में — "वीरतम से लड़ी रानी।"
- संख्यावाचक: 'दो बैलों की कथा' में — "दो बैल।"
- सार्वनामिक: 'घर की याद' में — "मेरा घर।"
- परिमाणवाचक: 'रीढ़ की हड्डी' में — "थोड़ी देर।"
4. क्रिया (Verb)
जो शब्द किसी कार्य करने या होने का बोध कराता है, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे — चलना, खाना, सोना, होना।
क्रिया के भेद (कर्म के आधार पर)
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| सकर्मक | जिस क्रिया के लिए कर्म की आवश्यकता होती है | वह पुस्तक पढ़ता है। |
| अकर्मक | जिस क्रिया के लिए कर्म की आवश्यकता नहीं होती | वह सो रहा है। |
| प्रेरणार्थक | जो क्रिया किसी से कार्य करवाने का बोध कराती है | उसने मुझसे चिट्ठी लिखवाई। |
गंगा पाठ्यपुस्तक से उदाहरण
- सकर्मक: 'दो बैलों की कथा' में — "जोरावर सिंह ने खेत जोता।" (खेत = कर्म)
- अकर्मक: 'रैदास के पद' में — "रैदास रोया।" (कोई कर्म नहीं)
- प्रेरणार्थक: 'संवादाधीन' में — "शिक्षक ने विद्यार्थी से पाठ याद करवाया।"
परीक्षा में महत्व
वार्षिक परीक्षा में इस विषय के लिए 4 अंक निर्धारित हैं। प्रश्न प्रायः गंगा पाठ्यपुस्तक के किसी अध्याय के अंश में से शब्दों को पहचानकर उनकी कोटि बताने के रूप में आते हैं। अध्यायों को ध्यान से पढ़कर संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया की पहचान का अभ्यास करें।
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