अलंकार — अनुप्रास, यमक, श्लेष
हिंदी काव्य में भाषा को सुंदर, प्रभावशाली और आकर्षक बनाने के लिए जिन साधनों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें अलंकार कहते हैं। गंगा पाठ्यपुस्तक के व्यावहारिक व्याकरण खंड में इस विषय के लिए 4 अंक निर्धारित हैं। पाठ्यक्रम में केवल तीन अलंकार शामिल हैं — अनुप्रास, यमक और श्लेष।
अलंकार की परिभाषा
संस्कृत के 'अलं कृति' से बना शब्द अलंकार का अर्थ है — 'आभूषण' या 'सजावट'। जिस प्रकार आभूषण से शरीर सुंदर दिखता है, उसी प्रकार अलंकार से काव्य या भाषा सुंदर, चमत्कारी और प्रभावशाली बनती है। काव्य में शब्दों और अर्थों के विशेष प्रयोग से जो चमत्कार उत्पन्न होता है, वही अलंकार है।
अलंकार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
- शब्दालंकार: शब्द के प्रयोग से उत्पन्न सौंदर्य (जैसे अनुप्रास, यमक)।
- अर्थालंकार: अर्थ के विशेष प्रयोग से उत्पन्न सौंदर्य (जैसे श्लेष)।
1. अनुप्रास (Alliteration)
जिस अलंकार में एक ही वर्ण (स्वर या व्यंजन) की बार-बार आवृत्ति (पुनरावृत्ति) होती हो, उसे अनुप्रास अलंकार कहते हैं। इससे काव्य में एक लय और संगीतात्मकता उत्पन्न होती है।
पहचान
किसी पंक्ति में यदि एक ही वर्ण या ध्वनि बार-बार आती है, तो वहाँ अनुप्रास अलंकार है। उदाहरण: "तेरे भए तौ भले भए तेरे न भए न भले" — यहाँ 'भ' वर्ण की पुनरावृत्ति है।
उदाहरण
- "रघुपति राघव राजा राम।" — 'र' वर्ण की आवृत्ति।
- "चंद्र चंदा चंद्र चंदा।" — 'च' वर्ण की आवृत्ति।
- "सुंदर सा न्यारा स्वागत है।" — 'स' वर्ण की आवृत्ति।
गंगा पाठ्यपुस्तक से उदाहरण
- 'रैदास के पद' में: "सब ऊपर तेरा ठाँव रैदास।" — पद में लय और ध्वनि-सौंदर्य।
- 'झाँसी की रानी' में सुभद्रा कुमारी चौहान की पंक्तियों में अनेक स्थानों पर अनुप्रास का प्रयोग मिलता है।
- 'वैष्णव जन तो तेने कहिये' में नरसैया मेहता की भक्ति पंक्तियों में ध्वनि-सौंदर्य।
2. यमक (Rhyme / Homonym)
जिस अलंकार में एक ही शब्द या ध्वनि अलग-अलग अर्थों में बार-बार प्रयुक्त हो, उसे यमक अलंकार कहते हैं। यहाँ रूप एक ही होता है परंतु अर्थ अलग-अलग होते हैं।
पहचान
यदि किसी पंक्ति में एक ही शब्द दो या अधिक बार आता है और हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है, तो वहाँ यमक अलंकार है।
उदाहरण
- "कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।
इहा खाय नर बौराय, उहा खाय भसम होय।" — यहाँ पहले 'कनक' का अर्थ सोना है और दूसरे 'कनक' का अर्थ धतूरा (मादक द्रव्य) है। - "आज तो गयो हरसों आज।" — यहाँ 'आज' के दो अर्थ हैं — एक 'आज' (वर्तमान दिन) और दूसरा 'आज' (आनंद)।
गंगा पाठ्यपुस्तक से उदाहरण
- 'रैदास के पद' में कुछ पदों में एक ही शब्द का प्रयोग अलग अर्थ में हुआ है।
- 'झाँसी की रानी' की पंक्तियों में यदि कोई शब्द दो बार आता है और उसका अर्थ बदलता है, तो वहाँ यमक है।
3. श्लेष (Pun / Double Meaning)
जिस अलंकार में एक ही शब्द या वाक्य से एक साथ दो या दो से अधिक अर्थ निकलते हों, उसे श्लेष अलंकार कहते हैं। यह अर्थालंकार है और इसमें शब्द के अनेक अर्थ गुप्त रहते हैं।
पहचान
यदि किसी पंक्ति के एक ही शब्द से एक साथ अनेक अर्थ निकलते हों और सभी अर्थ स्थान के अनुरूप हों, तो वहाँ श्लेष अलंकार है। यमक और श्लेष में अंतर यह है कि यमक में शब्द बार-बार आता है और अर्थ बदलता है, जबकि श्लेष में एक ही बार आने वाले शब्द से अनेक अर्थ एक साथ निकलते हैं।
उदाहरण
- "दुष्ट दहन दिन दिन अंक बढ़त बल बीर।" — यहाँ 'दिन दिन' से एक अर्थ 'रोज़-रोज़' और दूसरा 'सूर्य और चंद्र' है।
- "बुंदे बुंदे राजा सब इक ठाँव अति सोहागिनी।" — यहाँ 'बुंदे' के अनेक अर्थ हैं।
गंगा पाठ्यपुस्तक से उदाहरण
- 'रैदास के पद' में रैदास जी के पदों में भक्ति और समाज-समरसता के दोहरे अर्थों का प्रयोग।
- 'वैष्णव जन तो तेने कहिये' में नरसैया मेहता की परिभाषा में अनेक अर्थों का संगम।
अनुप्रास, यमक और श्लेष में अंतर
| आधार | अनुप्रास | यमक | श्लेष |
|---|---|---|---|
| प्रकार | शब्दालंकार | शब्दालंकार | अर्थालंकार |
| मुख्य विशेषता | वर्ण की पुनरावृत्ति | शब्द की पुनरावृत्ति, अर्थ अलग | एक शब्द, अनेक अर्थ एक साथ |
| उदाहरण | रघुपति राघव राजा राम | कनक कनक ते सौ गुनी | दिन दिन अंक बढ़त |
कैसे पहचानें? (परीक्षा के लिए संकेत)
- यदि एक ही वर्ण/ध्वनि बार-बार आ रही है — अनुप्रास।
- यदि एक ही शब्द बार-बार आ रहा है और अर्थ बदल रहा है — यमक।
- यदि एक ही शब्द से एक साथ अनेक अर्थ निकल रहे हैं — श्लेष।
परीक्षा में महत्व
वार्षिक परीक्षा में इस विषय के लिए 4 अंक निर्धारित हैं। प्रायः गंगा पाठ्यपुस्तक के किसी काव्य अध्याय की पंक्ति देकर उसमें अलंकार पहचानने को कहा जाता है, या किसी अलंकार की परिभाषा एवं उदाहरण लिखने को कहा जाता है। काव्य अध्यायों (रैदास के पद, झाँसी की रानी, वैष्णव जन तो तेने कहिये, आदि) को ध्यान से पढ़कर अलंकार पहचानने का अभ्यास करें।
विस्तृत अध्ययन सामग्री
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