संवाद लेखन

रचनात्मक लेखन 5 अंक ~80-100 शब्द

परिभाषा

संवाद लेखन (Dialogue Writing) एक ऐसा रचनात्मक लेखन कौशल है जिसमें दो या अधिक व्यक्तियों के बीच होने वाली बातचीत को लिखित रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह नाटकीय और वार्तालाप-शैली का लेखन है, जिसमें प्रत्येक वक्ता के कथन उसके नाम के साथ क्रमशः लिखे जाते हैं। संवाद का उद्देश्य किसी विशेष स्थिति या विषय पर पात्रों की मनोभूमि, विचारों और संवाद-कौशल को सजीव रूप से अभिव्यक्त करना होता है।

परीक्षा में महत्व

कक्षा 9 हिंदी (गंगा पाठ्यपुस्तक) की वार्षिक परीक्षा में संवाद लेखन के लिए 5 अंक निर्धारित हैं। अपेक्षित शब्द संख्या लगभग 80–100 शब्द है। विद्यार्थी को किसी दी गई स्थिति या विषय पर आधारित एक स्वाभाविक और सार्थक संवाद तैयार करना होता है।

स्थिति / विषय पर आधारित लेखन

प्रश्नपत्र में किसी विशेष स्थिति या विषय का संकेत दिया जाता है — जैसे दो मित्रों के बीच परीक्षा की तैयारी पर चर्चा, शिक्षक और विद्यार्थी का संवाद, माता-पुत्र की बातचीत, दुकानदार और ग्राहक का संवाद आदि। विद्यार्थी को उस स्थिति के अनुरूप पात्रों की भूमिका, भाषा और संवाद-प्रवाह की रचना करनी होती है।

प्रारूप

संवाद लेखन का प्रारूप सरल और स्पष्ट होता है:

  • वक्ता का नाम: प्रत्येक उत्तर के आरंभ में बोलने वाले पात्र का नाम — उसके बाद कोलन (:) चिह्न।
  • बातचीत का क्रम: पात्रों के कथन एकांतर (alternate) क्रम में लिखे जाते हैं — एक के बाद दूसरे का उत्तर, इसी क्रम में आगे।

टिप्पणियाँ

  • प्राकृतिक बोलचाल की भाषा: संवाद में बोलचाल की सहज, जीवंत भाषा का प्रयोग करें — अनावश्यक औपचारिकता से बचें।
  • संक्षिप्त: प्रत्येक उत्तर संक्षिप्त और सारगर्भित हो — लंबे-लंबे कथन टालें।
  • स्थिति के अनुरूप: भाषा, शैली और विषय-वस्तु दी गई स्थिति के अनुरूप हो — पात्रों का स्वभाव और संबंध प्रतिबिंबित हो।
  • शब्द सीमा: लगभग 80–100 शब्दों की सीमा का ध्यान रखें।

विस्तृत अध्ययन सामग्री

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