भवानीप्रसाद मिश्र
कवि गांधीवादी काव्य 12
जीवन परिचय
भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म 29 मार्च 1913 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के आवागाँव में हुआ था। वे हिंदी के प्रसिद्ध गांधीवादी कवि थे। उन्होंने गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलनों में भाग लिया और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहे। उनकी कविता में गांधीवादी मूल्यों — सत्य, अहिंसा, सादगी — की गहरी छाप है। उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। उनका निधन 20 फरवरी 1986 को हुआ।
प्रमुख रचनाएँ
- काव्य संग्रह: बुनी हुई रेत, गीत-पर्व, तृतीय युग, प्रवीण कुटुम्बक, आँगन के पार दिवस
- प्रसिद्ध कविता: घर की याद, सत्यम शिवम् सुंदरम, बुनी हुई रेत
लेखन शैली
भवानीप्रसाद मिश्र की कविता सहज, सरल और जनजीवन से जुड़ी हुई है। उनकी भाषा में गाँव की सादगी, प्रकृति की संवेदना और मानवीय मूल्यों का गहरा बोध है। उन्होंने जीवन की साधारण चीजों में भी काव्य-सौंदर्य खोजा। उनकी कविता विचार और भाव का सुंदर संगम है।
साहित्यिक योगदान
भवानीप्रसाद मिश्र ने हिंदी कविता में गांधीवादी सौंदर्य-बोध को स्थापित किया। उन्हें 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' और 'शलाका सम्मान' सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। उनकी कविता 'बुनी हुई रेत' हिंदी काव्य की एक मील का पत्थर रचना है।
गंगा पाठ्यपुस्तक में
गंगा पाठ्यपुस्तक के काव्य खंड में उनकी भावात्मक कविता 'घर की याद' शामिल है।
विस्तृत अध्ययन सामग्री
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