घर की याद

कवि: भवानीप्रसाद मिश्र   भावात्मक कविता   काव्य 12

पाठ का सारांश

भवानीप्रसाद मिश्र की कविता 'घर की याद' घर-परिवार से दूर रहने वाले व्यक्ति की गहरी भावनाओं का संवेदनशील अभिव्यक्ति है। कवि ने विदेश या दूर स्थान पर रहकर अपने घर, परिवार और बचपन की स्मृतियों की याद में जो कविता लिखी है, वह हर उस व्यक्ति के हृदय को छू लेती है जो अपनों से दूर है। कविता में माँ के हाथ की छुअन, घर की देखभाल, बचपन के खेल और परिवार के साथ बिताए पल — ये सभी स्मृतियाँ ताज़गी से जीवंत हो उठती हैं। यह मानवीय संवेदनाओं की सहज और सरल कविता है।

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