तब याद तुम्हारी आती है
कवि: रामेश्वर त्रिपाठी अतिरिक्त पठन साथ-साथ पढ़ें
पाठ का सारांश
रामेश्वर त्रिपाठी की यह कविता स्मृतियों और यादों की गहरी भावनाओं का अभिव्यक्ति है। कवि बताते हैं कि किस प्रकार जीवन के विभिन्न क्षणों में — एकांत में, प्रकृति के सानिध्य में, या रात के शांत मूहूर्तों में — अतीत की स्मृतियाँ अचानक ताज़गी के साथ जीवंत हो उठती हैं। यह कविता मानवीय अनुभूतियों की सूक्ष्म समझ और संवेदनशीलता का परिचायक है। कवि की भाषा सहज और हृदयस्पर्शी है जो पाठक को अपनी स्मृतियों के साथ जोड़ लेती है।
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