झाँसी की रानी
कवि: सुभद्रा कुमारी चौहान देशभक्ति कविता काव्य 11
पाठ का सारांश
सुभद्रा कुमारी चौहान की यह अमर कविता झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य, त्याग और देशभक्ति की गाथा है। कविता 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में रानी के वीरतापूर्ण संघर्ष का सजीव चित्रण करती है। अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध में उनका अदम्य साहस, घोड़े पर तलवार लिए लड़ती हुई रानी का तेज और अंततः शहादत — यह सब कवि ने ओजस्वी भाषा में प्रस्तुत किया है। 'बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी' जैसी पंक्तियाँ राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष हैं।
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