भारती, जय, विजय करे!
कवि: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' देशभक्ति कविता काव्य 10
पाठ का सारांश
निराला की यह अद्भुत देशभक्ति कविता भारत माता के गौरव, उसकी विभूतियों और सांस्कृतिक विरासत का उद्घोष है। कवि भारत की अमर गाथा, उसके त्याग, तपस्या और शौर्य का गान करते हैं। कविता में देश की भौगोलिक विशालता, आध्यात्मिक गरिमा और अजेय चेतना का चित्रण है। 'भारती, जय, विजय करे!' का स्वर न केवल एक स्तुति है बल्कि एक प्रेरणा-भरा आह्वान है जो प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशभक्ति का ज्वार भर देता है। निराला की प्रकृति-चेतना यहाँ राष्ट्र-चेतना के साथ एकाकार हो गई है।
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