राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

कवि: तुलसीदास   कविता   काव्य 9

पाठ का सारांश

यह पाठ गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस से लिया गया है। इसमें श्री राम, लक्ष्मण और परशुराम के बीच का संवाद प्रस्तुत है। सीता स्वयंवर के बाद परशुराम क्रोध से आते हैं और शिव धनुष टूटने पर राम से युद्ध की चुनौती देते हैं। लक्ष्मण की तीखी बातों से परशुराम का क्रोध और बढ़ता है। अंततः राम की शांत, विनम्र और तेजस्वी उपस्थिति से परशुराम को श्री राम के ईश्वरीय स्वरूप का बोध होता है और वे शांत हो जाते हैं। यह संवाद शांति, धैर्य और दिव्यता की विजय का प्रतीक है।

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