सुभद्रा कुमारी चौहान

कवयित्री वीर-रस काव्य 11

जीवन परिचय

सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म 16 अगस्त 1904 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) के निकट निहालपुर गाँव में हुआ था। उनका परिवार बुंदेलखंड के झाँसी के समीप का था। उन्होंने क्रांतिकारी ठाकुर लक्ष्मण सिंह से विवाह किया। वे स्वयं स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहीं और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। उनका निधन 15 फरवरी 1948 को एक कार दुर्घटना में हुआ।

प्रमुख रचनाएँ

  • काव्य संग्रह: मुकुल, त्रिधारा, वीर रस कविताएँ, बुंदेले हरबोले
  • कहानी संग्रह: बीबी से बहू तक, नीचे का घर
  • प्रसिद्ध कविता: झाँसी की रानी, वीर कन्या, मुकुल

लेखन शैली

सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता वीर-रस से पूरित, ओजस्वी और राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत है। उनकी भाषा खड़ी बोली और बुंदेली का मिश्रण है जो उनकी कविता में एक विशिष्ट लय और गति पैदा करती है। 'झाँसी की रानी' कविता उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है जो आज भी भारतीय विद्यालयों में पढ़ाई जाती है।

साहित्यिक योगदान

सुभद्रा कुमारी चौहान हिंदी साहित्य की एक अद्वितीय कवयित्री हैं जिन्होंने वीर-रस की कविता में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। 'झाँसी की रानी' कविता ने पीढ़ियों को प्रेरित किया है। वे स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री दोनों रूपों में अपनी छाप छोड़ गईं।

गंगा पाठ्यपुस्तक में

गंगा पाठ्यपुस्तक के काव्य खंड में उनकी अमर कविता 'झाँसी की रानी' शामिल है।

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