शेखर जोशी

कहानीकार उपन्यासकार गद्य 3

जीवन परिचय

शेखर जोशी का जन्म 1932 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के ओखलाकोट गाँव में हुआ था। वे आधुनिक हिंदी कहानी के प्रमुख लेखकों में गिने जाते हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में कई वर्षों तक शिक्षण कार्य से जुड़े रहे। उनकी कहानियों में उत्तराखंड के पहाड़ी जीवन, गाँव की सादगी और आधुनिक संवेदनाओं का सुंदर संगम मिलता है।

प्रमुख रचनाएँ

  • कहानी संग्रह: परबत और प्रतिप्रखर, कुशुम कलियाँ, अवान्तर, टीकाराम के बलदाऊ
  • उपन्यास: नैनीताल की बर्फ़, पहाड़ का निर्वास
  • प्रसिद्ध कहानियाँ: संवादहीन, धूमकेतु, भावी प्रतिनिधि

लेखन शैली

शेखर जोशी की कहानियाँ पहाड़ी जीवन की संवेदनाओं को बड़ी सहजता से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी शैली यथार्थवादी है और उनके पात्र सामान्य मनुष्यों के संघर्ष, भावनाओं और अनुभवों से जीवंत होते हैं। वे आधुनिक जीवन की विसंगतियों और मानवीय संबंधों के क्षरण को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करते हैं।

साहित्यिक योगदान

शेखर जोशी ने हिंदी कहानी को एक नया भौगोलिक और सांस्कृतिक आयाम दिया। उत्तराखंड के पहाड़ी जीवन को उन्होंने राष्ट्रीय साहित्य के मंच पर स्थापित किया। उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

गंगा पाठ्यपुस्तक में

गंगा पाठ्यपुस्तक के गद्य खंड में शेखर जोशी की कहानी 'संवादहीन' शामिल है। यह कहानी आधुनिक युग की भावनात्मक विच्छिन्नता और संवादहीनता पर केंद्रित है।

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