मैं और मेरा देश
लेखक: कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' निबंध गद्य 7
पाठ का सारांश
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का यह निबंध व्यक्ति और राष्ट्र के अंतरसंबंधों को सहज और विचारोत्तेजक शैली में प्रस्तुत करता है। लेखक बताते हैं कि किस प्रकार हमारी व्यक्तिगत पहचान हमारे देश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से अविभाज्य रूप से जुड़ी होती है। निबंध में भारत की विविधता, एकता, सांस्कृतिक धरोहर और नागरिक दायित्वों पर प्रकाश डाला गया है। लेखक का मानना है कि देश के प्रति प्रेम केवल भावुकता नहीं बल्कि व्यावहारिक दायित्व है जो हमारे दैनिक आचरण में परिलक्षित होना चाहिए।
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